
| На ветке я — распустившийся лепесток. Нет, не лепесток, — бабочка я. Нет, даже не бабочка. Крылышко, которое — поймай рукой — и только цвет останется, а сожми руку, то даже пылинки не останется. --перевод: Гурам Браун | डाल पर खिली हुई पंखुरी हूँ नहीं पंखुरी तो नहीं तितली नहीं तितली भी नहीं पंख कि हाथ से मसलो तो बस रंग और हाथ झाड़ो तो धूल भी नहीं। --पूर्णिमा वर्मन |

इस चिट्ठे पर प्रकाशित कविताओं के रूसी अनुवादक गुराम की मातृभाषा जॉर्जियाई है, उनकी पढ़ाई रूसी माध्यम से हुई और उन्होंने जर्मन भाषा व साहित्य में विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन के परिणाम स्वरूप भारतीय कला व संस्कृति से अनन्य प्रेम रखने वाले गुराम हिंदी के अतिरिक्त उर्दू और संस्कृत भाषाओं के भी जानकार हैं। संप्रति वे जर्मनी के म्यूनिख नगर में जर्मन भाषा के अध्यापक हैं।
1 comment:
मैं आलोचक तो नहीं हूं कि आपकी कविता के शिल्प और भाषा आदि के बारे में विस्तार से कुछ कह सकूं, लेकिन इतना ज़रूर कहुंगा कि छोटी सी यह कविता बड़े अर्थ छिपाए हुए है, खुद में...
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